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औरंगाबाद :[संजीव कुमार]-सीआरपीएफ का शौर्य दिवस-9 अप्रैल 1965 की विजयी जंग की यादें हुई ताज़ा,पाकिस्तान के नापाक हरकतों को किया था असफल

मगध एक्सप्रेस [ 10 अप्रैल 18 ]-आज 9 अप्रैल 2018 सीआरपीएफ के लिए ख़ास दिन है।जोश और जज्बे से ओत प्रोत अपनी बहादूरी के लिए सुप्रसिद्ध केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 153वीं बटालियन के द्वारा औरंगाबाद मुख्यालय में शान से शौर्य दिवस मनाया गया।इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद 153वीं बटालियन के मुख्य अतिथि द्वितीय कमान अधिकारी एस.डी.त्रिपाठी ने देश के सुरक्षा में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए सीआरपीएफ बल के शौर्य गाथा का विस्तार रूप से वर्णन किया और 9 अप्रैल 1965 की याद तो ताज़ा कार्य हुए उपस्थित अधिकारीयों एवं जवानों में जोश भरा।उसने कहा कि,आज का दिन सीआरपीएफ के लिए बहुत बड़ा दिन है।आज के दिन ही 1965 में सीआरपीएफ की टीम ने अपनी अद्भुत क्षमता का परिचय दिया था और पाकिस्तान के कायराना हरकतों को मुहतोड़ जवाब देते हुए नापाक हरकतों को असफल किया था।

सीआरपीएफ देश की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करती है।अपने अद्भुत क्षमता के बल पर किसी भी परिस्थिति में तैनात रहती है।यह हम सभी के लिए फक्र की बात है।गौरतलब है कि,9 अप्रैल 1965 को भारतीय अंतराष्ट्रीय सीमा चौकियों को पाकिस्तान द्वारा ऑपरेशन डेजर्ट हॉक जो की गुजरात के रण ऑफ़ कच्छ में सरदार और टाक चौकियों का रख-रखाव सीआरपीएफ के द्वारा की जा रही थी उसी समय पाकिस्तानी सेना के इन्फेंट्री बिग्रेड के द्वारा अकस्मात हमला कर दिया गया था।सीआरपीएफ के जवानों ने वीरता पूर्वक न सिर्फ उस हमले को निष्फल किया था बल्कि उसमे 34 पाकिस्तानी जवानों को मार गिराया था और चार को जिन्दा पकड़ा था।सीआरपीएफ के इस बहादूरी के लिए तत्कालीन गृह मंत्री गुलजारी लाल नंदा ने इसे ऐतिहासिक जंग करार देते हुए सीआरपीएफ के वीरता को सलाम किया था।

शौर्य दिवस पर जिला मुख्यालय परिसर में सैनिक सम्मलेन के साथ बड़ाखाना का आयोजन किया गया और अनेक प्रकार के खेल कूद का आयोजन किया गया जिसमे फुटबॉल,कब्बडी और वॉली बॉल आदि सम्मिलित है।इस अवसर पर द्वितीय कमान अधिकारी सी.एन.राजीव कुमार,ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह,सूबेदार मेजर अशोक कुमार तिवारी के साथ सीआरपीएफ के अधीनस्थ अधिकारी एवं जवान उपस्थित रहे।

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